
नई दिल्ली – दागी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को हटाने संबंधी प्रस्तावित बिलों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी ने देश की राजनीति को गरमा दिया है। शाह ने कहा था कि “भ्रष्टाचार या गंभीर अपराधों के आरोपी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री जेल से सरकार नहीं चला सकते।”
शाह के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर हमला बोल दिया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया कि यह बयान इस बात का सबूत है कि भाजपा ने पहले से ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पद से हटाने की साज़िश रच रखी थी।
आप सुप्रीमो केजरीवाल ने पलटवार करते हुए सवाल किया, “जो नेता भ्रष्ट व्यक्तियों को अपनी पार्टी में शामिल कर उन्हें पद और सम्मान देते हैं, क्या उन्हें भी अपने पदों से इस्तीफा नहीं दे देना चाहिए?”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शाह की टिप्पणी ने भ्रष्टाचार बनाम सियासत की बहस को और तेज कर दिया है। जहां भाजपा इस कदम को पारदर्शिता की दिशा में जरूरी मान रही है, वहीं विपक्ष इसे सत्ता से विपक्षी नेताओं को हटाने का हथियार बता रहा है।









