केंद्र सरकार ने गेहूं पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा कर दी है। मोदी सरकार ने इसे किसानों के लिए दीवाली का तोहफा बताया है। इसके जवाब में पंजाब किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवण सिंह पंधेर ने केंद्र सरकार को जवाब देते हुए वीडियो जारी किया है। पंधेर ने वीडियो में कहा कि केंद्र सरकार दीवाली का तोहफा कहकर MSP वृद्धि का प्रचार कर रही है। सरकार कह रही है कि उसने 100 फीसदी बढ़ोतरी की है, लेकिन ये सरासर गलत प्रचार है। असल में एमएसपी में 100 नहीं साढ़े 6 फीसदी की भी बढ़ोतरी नहीं हो पाई है। 1 अक्तूबर से केंद्र ने गेहूं पर तय की एमएसपी हर साल केंद्र सरकार फसलों पर खरीफ और रबी सीजन से पहले एमएसपी का ऐलान करती है। साल 2025-26 की खरीद के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का रेट 160 रुपए बढ़ाया है। इससे मंडियों में गेहूं इस बार 2585 रुपए बिकेगी। पिछले साल इसका रेट 2,425 रुपए था। हमें एमएसपी की कानूनी गारंटी चाहिए किसान नेता सरवण सिंह पंधेर कि उनको एमएसपी पर कानूनी गारंटी चाहिए न कि हर साल होने वाली ऐसी मामूली वृद्धि। ये केवल किसानों को उलझन में डालने वाली नीति है। अगर एमएसपी पर कानूनी गारंटी मिलती है तो किसानों को फसल की लागत निकालने के बाद एमएसपी बढ़ोतरी का फायदा मिलना था। एमएस स्वामीनाथन ने भी इसके लिए कास्ट निकालने के बाद रेट तय करने का ही फॉर्मूला बनाया है। वीडियो ने पंधेर ने कहीं तीन अहम बातें गलत प्रचार किया जा रहा केंद्र सरकार 100 फीसदी एमएसपी बढ़ाने की बात कहकर गलत प्रचार कर रही। एक्चुअल में ये बढ़ोतरी 6.60 फीसदी है।
जौं-चने और सूरजमुखी का रेट बढ़ने का हमें फायदा नहीं पंधेर ने कहा कि जौं, सूरजमुखी, चने और मसूर की एमएसपी में भी 4 से 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। मगर इसका पंजाब को कोई फायदा नहीं है। यहां तो कोई फसल खरीदी नहीं जाती। इसका रेट 6540 रुपए है लेकिन ये पंजाब में 3 हजार रुपए क्विंटल भी नहीं बिकता।
सी टू फिफ्टी फॉर्मूला लागू नहीं किया पंधेर ने कहा कि किसानों की मांग थी कि एमएसपी को सी टू फिफ्टी परसेंट के हिसाब से बढ़ाया जाए। स्वामीनाथन कमेटी ने भी यही रिकमेंडेशन की थी। इसका मतलब है कि किसान की कास्ट का 50 फीसदी बढ़ाकर रेट दिया जाए।
फसलों पर लागत बढ़ रही, रेट नहींः पंधेर ने सवाल उठाया कि आए दिन मजदूरी बढ़ रही है। खादों के रेट बढ़ रहे हैं। मशीनरी और ट्रैक्टरों के रेट बढ़ गए हैं। इससे पूरी खेती पर लागत बढ़ रही है। इस लागत के हिसाब से एमएसपी बढ़ाई जानी चाहिए। इसलिए ही हम एमएसपी की कानूनी गारंटी मांग रहे थे। पंजाब में 35 लाख हेक्टेयर में होती है 181 मीट्रिक टन गेहूं
पंजाब में 35 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की जाती है। सूबे के 12 लाख किसान परिवार सीधे खेती से जुड़े हैं। पिछले साल पंजाब ने 181 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन किया था। केंद्र की एफसीआई के अलावा गेहूं की सरकारी खरीद पंजाब की 4 एजेंसियां करती हैं।









