
छोटा राजन…जुर्म की दुनिया का वो नाम, जिससे हर कोई परिचित होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उसका गुरु कौन था? वो था बड़ा राजन उर्फ राजन महादेव नायर. ये दाऊद इब्राहिम के करीबियों में था. कहा जाता है कि अगर बड़ा राजन आज ज़िंदा होता, तो शायद दाऊद और छोटा राजन के बीच दुश्मनी भी नहीं होती.
मुंबई में दर्जी का काम करने वाले राजन नायर ने अपनी प्रेमिका के लिए अपराध की दुनिया चुनी. शुरुआत में वह महंगे टाइपराइटर चुराता था. लेकिन एक चोरी के केस में वह पकड़ा गया. इसमें उसे तीन साल की सज़ा हुई. जेल से निकलने के बाद उसने अपराधियों का एक गिरोह बनाया. गिरोह का नाम रखा ‘गोल्डन गैंग ‘. इस गिरोह ने लूट, रंगदारी सहित कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया. चूंकि राजन इस गिरोह का सरगना था, इसलिए 1970 के बाद इस गैंग को ‘राजन गैंग ‘ के नाम से जाना जाने लगा.
बड़ा राजन ने अपना पूरा कारोबार मुंबई के चेंबूर से शुरू किया था. उसका मुख्य धंधा जबरन वसूली, रंगदारी, तस्करी और फिल्म टिकटों की कालाबाजारी था. वह अपने गुर्गों की मदद से ये सब करता था. 1979 में उसकी मुलाकात एक लड़के से हुई, जिसका नाम राजेंद्र सदाशिव निखलजे था. राजेंद्र विक्रोली इलाके में टिकटों की कालाबाजारी करता था. यही राजेंद्र सदाशिव निखलजे आगे चलकर ‘छोटा राजन’ के नाम से जाना गया.
छोटा राजन का गुरु था बड़ा राजन
कुछ ही समय में दोनों अच्छे दोस्त बन गए. साथ काम करने की वजह से राजेंद्र सदाशिव निखलजे को लोग ‘छोटा राजन’ कहने लगे. दाऊद ने बड़ा राजन के कहने पर छोटा राजन को अपने गिरोह में शामिल किया था. छोटा राजन उसे अपना गुरु मानता था. 1980 के आसपास दोनों ने मिलकर एक गिरोह बनाया. बड़ा राजन दाऊद के ज़मीन से जुड़े विवादों को निपटाता, निर्माण मजदूरों से रंगदारी वसूलता और उन्हें सुरक्षा प्रदान करता, जबकि छोटा राजन उसके काम में उसकी मदद करता.
तमिल डॉन वरदराजन मुदलियार मुंबई से मद्रास चला गया. उसके बाद बड़ा राजन ने उसकी जुर्म की विरासत संभाली और दाऊद इब्राहिम को ताकतवर बनाया. दोनों ने चेंबूर से घाटकोपर तक अपना प्रभाव बढ़ाया और तस्करी के धंधे में करीम लाला और हाजी मस्तान को टक्कर दी. बड़ा राजन के बारे में कहा जाता है कि अगर वह दाऊद के साथ न होता, तो दाऊद अंडरवर्ल्ड पर अपनी पकड़ कभी मज़बूत नहीं कर पाता.
राजन महादेव की गोली मारकर हत्या
1980 के दशक के आखिर में बड़ा राजन ने अब्दुल कुंजू नाम के एक अपराधी को अपने गिरोह में जगह दी. लेकिन कुछ समय बाद अब्दुल कुंजू ने बड़ा राजन की प्रेमिका से शादी कर ली. इससे बड़ा राजन नाराज़ हो गया और दोनों दुश्मन बन गए. 1982 में पठान बंधुओं ने अब्दुल की मदद से बड़ा राजन की हत्या की साज़िश रची. इसके बाद, राजन महादेव नायर को कोर्ट के बाहर गोली मार दी गई औऱ उसकी मौत हो गई.
छोटा राजन ने अपने गुरु की हत्या का बदला लिया
1982 में बड़ा राजन की हत्या के बाद पूरी ज़िम्मेदारी छोटा राजन पर आ गई. छोटा राजन ने बड़ा राजन के हत्यारों को मारने का फैसला किया. अब्दुल छोटा राजन से इतना डर गया था कि उसने एक साल बाद 9 अक्टूबर 1983 को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. छोटा राजन और उसके गुंडों ने अब्दुल कुंजू को मारने की कई कोशिशें कीं, लेकिन वह हर बार बच निकला.
1984 तक छोटा राजन दाऊद का खास बन चुका था. इसी दौरान छोटा राजन को पता चला कि अब्दुल कुंजू किसी खेल के मैदान में देखा गया है. इसलिए छोटा राजन वहां पहुंचा और खेल के मैदान के बीचों-बीच अब्दुल कुंजू को गोली मार दी. अब्दुल की मौत से उसने अपने गुरु की हत्या का बदला पूरा किया. आगे चलकर वह दाऊद के बाद मुंबई का सबसे बड़ा डॉन बन गया.
टिकटों की कालाबाजारी
छोटा राजन का असली नाम राजेंद्र सदाशिव निखलजे है, लेकिन अपराध की दुनिया में लोग उसे छोटा राजन के नाम से जानते हैं. छोटा राजन का जन्म 1959 में मुंबई के चेंबूर इलाके में हुआ था. एक साधारण परिवार से आने वाले राजन ने छोटी उम्र से ही टिकटों की कालाबाजारी और छोटे-मोटे अपराध करके पैसा कमाना शुरू कर दिया था.
छोटा राजन का नाम असल में तब सुर्खियों में आया जब उसका नाम दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी से जुड़ा. दोनों ने मिलकर मुंबई में जबरन वसूली, तस्करी, हत्या और अवैध धंधों का जाल फैलाया. 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद राजन ने दाऊद से दूरी बना ली.
राजन ने खुद को राष्ट्रवादी बताया और साफ किया कि वह पाकिस्तान समर्थित दाऊद से अलग है. इसी वजह से उनकी दोस्ती दुश्मनी में बदल गई और मुंबई अंडरवर्ल्ड में खूनी गैंगवार छिड़ गया. राजन 2015 तक फरार था, जिसके बाद उसे 2015 में इंडोनेशिया से गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, ऐसा कहा जाता है कि अगर बड़ा राजन जिंदा होता तो दाऊद से उसकी दुश्मनी खत्म हो गई होती.









