
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाढ़ प्रभावितों के लिए बड़े राहत पैकेज का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दिवाली से पहले प्रभावित किसानों और परिवारों को मुआवजा देना शुरू कर देगी। इसकी शुरुआत 15 अक्टूबर से होगी।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि किसानों को खेतों से रेत हटाने के लिए 7,200 रुपये प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता दी जाएगी, जबकि दरिया-बुरद हुई जमीनों के मालिकों को 18,800 रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा मिलेगा।
मान ने बताया कि राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) के नियमों में संशोधन कर मुआवजे की राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। अब 26 से 33% तक फसल नुकसान पर किसानों को 10,000 रुपये प्रति एकड़ (पहले 2,000 रुपये), 33 से 75% नुकसान पर 10,000 रुपये प्रति एकड़ (पहले 6,800 रुपये) और 75 से 100% नुकसान पर 20,000 रुपये प्रति एकड़ (पहले 6,800 रुपये) मुआवजा मिलेगा। इनमें से 14,900 रुपये प्रति एकड़ राज्य सरकार वहन करेगी।
इसके अलावा पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण के लिए 1.20 लाख रुपये और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए मुआवजा बढ़ाकर 35,100 रुपये कर दिया गया है, जो पहले सिर्फ 6,500 रुपये था। सरकार पहले ही सैलाब प्रभावित क्षेत्रों के लिए 4.50 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बिहार जैसे चुनावी राज्यों में तो बड़े राहत पैकेज का ऐलान कर रहे हैं, लेकिन पंजाब के साथ उपेक्षा का रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र संघीय ढांचे को कमजोर कर रहा है और पंजाब को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने की कोशिश कर रहा है, जिसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मान ने यह भी याद दिलाया कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान पंजाब के लोगों ने सोने और नकदी के रूप में राष्ट्रीय रक्षा कोष में बड़ा योगदान दिया था। भाजपा द्वारा आयोजित ‘मॉक सेशन’ पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने चुटकी ली कि ऐसे नेताओं को जनता 2029 के लोकसभा चुनावों के बाद फर्जी सत्र करने का भरपूर समय दे देगी।









