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Anant Chaturdashi 2025: अनंत चतुर्दशी पर पहली बार कर रहे हैं बप्पा को विदा, तो जान लें विसर्जन की पूरी परंपरा

Ganesh Visarjan Rules: पंचांग के अनुसार, इस साल 6 सितंबर 2025 को अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व मनाया जाएगा. गणेश उत्सव का पर्व गणेश चतुर्थी के दिन से शुरू होकर 10 दिनों तक चलता है और इसका समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है. यह दिन गणेश उत्सव के समापन का प्रतीक है, जब भक्तगण भगवान गणेश की प्रतिमा को पूरे विधि-विधान के साथ विसर्जित करते हैं. अगर आप पहली बार बप्पा को विदा कर रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि विसर्जन की प्रक्रिया क्या होती है और इससे जुड़ी किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

अनंत चतुर्दशी 2025: गणेश विसर्जन के शुभ मुहूर्त

  • शुभ चौघड़िया: सुबह में 7 बजकर 26 मिनट से 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगा.
  • लाभ चौघड़िया : दोपहर में 1 बजकर 54 मिनट से 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगा.
  • अमृत चौघड़िया : दोपहर में 3 बजकर 28 मिनट से 5 बजकर 3 मिनट तक रहेगा.

गणेश विसर्जन की सही विधि

अंतिम पूजा: विसर्जन से पहले, बप्पा की फिर से पूजा करें. उन्हें मोदक, लड्डू और उनके प्रिय भोग अर्पित करें. आरती करें और “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” का जयकारा लगाएं.

माफी मांगें: जाने-अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए बप्पा से क्षमा याचना करें. उनसे प्रार्थना करें कि वे आपके घर और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें.

सामान हटाएं: प्रतिमा के साथ-साथ पूजा में उपयोग की गई सभी सामग्री जैसे फूल, माला, वस्त्र और सजावट की वस्तुएं हटा लें. इन्हें भी विसर्जन के लिए तैयार करें.

विसर्जन स्थल: मूर्ति का विसर्जन पवित्र नदी, झील या तालाब में किया जाता है. आजकल पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कृत्रिम कुंडों और घर में बाल्टी में भी विसर्जन किया जाने लगा है. सुनिश्चित करें कि आप केवल ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा का ही विसर्जन करें.

विसर्जन: प्रतिमा को धीरे-धीरे जल में विसर्जित करें. विसर्जन के दौरान भी बप्पा का नाम लेते रहें और उन्हें भावभीनी विदाई दें.

अनंत चतुर्दशी का महत्व

अनंत चतुर्दशी का दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप को समर्पित है, इसलिए इसे अनंत चतुर्दशी कहते हैं. इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अपने हाथ में 14 गांठों वाला अनंत सूत्र (रक्षा सूत्र) बांधते हैं. हालांकि, इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि इसी दिन गणेश उत्सव का भी समापन होता है. 10 दिनों तक घर आए बप्पा को धूमधाम से विदा किया जाता है ताकि अगले साल वह फिर से आ सकें.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Posted By City Home News

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