
रविवार की सुबह अचानक आए बादल फटने से कठुआ जिले के वार्ड-7 और वार्ड-8 क्षेत्र मेंषण संकट उत्पन्न हो गया। तेज पानी के बहाव ने चहारदीवारी तोड़ दी, पार्किंग में खड़ी कारों को बहा ले गया और मकानों को खंडहर में तब्दील कर दिया—इस त्रासदी ने इलाके में हड़कंप मचा दिया।
मुख्य घटनास्थल और तबाही का दृश्य
- वार्ड-8 के जुथाना के जोड़ में जनजातीय समुदाय के पाँच सदस्य, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, पानी की तेज लहरों की चपेट में आकर मारे गए। कई अन्य बुरी तरह घायल हुए।
- वार्ड-7 में पानी इतनी तेज़ी से आया कि लोग सोते-निदा किन हालातों में थे, उनका कुछ समझते-समझते पानी पाँच फीट तक भर गया। घबराए लोग छतों पर चढ़कर अपनी जान बचाने की कोशिश में जुटे। वहीं, गृहस्थी, राशन, बिस्तर और अन्य घरेलू सामान बह गए। कुछ घरों का निर्माण दो मंजिला होने की वजह से बच गया, लेकिन ज़मीन पर बने सघन घरों में सबकुछ तबाह हो गया
- तेज बहाव ने आईटीआई रोड पर खड़ी आधा दर्जन कारों को बहा लिया, उनमें से कई को भारी क्षति पहुँची।
रणनीतिक बिंदु और राहत प्रयास
- इस आपदा के कारण सड़क संपर्क कट गए, रेलवे संचार भी प्रभावित हुआ—ट्रेन यातायात रविवार सुबह से दोपहर तक बाधित रहा।
- rescue teams (सेना, NDRF, SDRF) को घटना स्थल पर भेजकर रेस्क्यू और राहत कार्य तेज कर दिया गया; घायल लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है।
संख्या, संदर्भ और हालात की गंभीरता
- इस आपदा में कुल सात लोगों की मौत हुई—जिसमें कई बच्चे शामिल हैं।
- यह घटना जम्मू-कश्मीर में हाल के दिनों में दूसरी बड़ी बादल फटने (cloudburst) की स्थिति है। इससे पहले, 14 अगस्त 2025 को किश्तवाड़ के चशोटी गाँव में आए भारी बादल फटने में 65 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, 300 से ज्यादा घायल और 200 से अधिक लापता रहे।









