
जम्मू-कश्मीर के किस्तवाड़ जिले के चुसोटी गांव में गुरुवार दोपहर 12 से 1 बजे के बीच भीषण बादल फटने की घटना ने तबाही मचा दी। ताजा जानकारी के अनुसार, अब तक 46 लोगों की मौत हो चुकी है, 160 से ज्यादा लोग घायल हैं और 220 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों में दो सीआईएसएफ जवान भी शामिल हैं।
यह इलाका मचल माता यात्रा का बेस कैंप है, जहां घटना के समय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। अचानक आई मूसलाधार बारिश से मलबे और पानी का सैलाब पूरे गांव पर टूट पड़ा, जिसने घर, दुकानें, गाड़ियां और सड़कें बहा दीं। बाढ़ और मलबे ने गांव की पूरी शक्ल बदल दी।
घटना के बाद जगह-जगह शव पड़े मिले, जिन्हें कफ़न में लपेटकर अस्पताल भेजा गया। अस्पतालों में बेड की कमी के चलते कई घायलों का इलाज जमीन पर किया जा रहा है। सेना, पुलिस, एनडीआरएफ और स्थानीय लोग कीचड़ से होकर घायलों को कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचा रहे हैं।
लगातार बारिश और भारी कीचड़ बचाव कार्य को बेहद कठिन बना रहे हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गृह मंत्री अमित शाह को स्थिति से अवगत कराया और कहा कि प्रभावित इलाकों से सही आंकड़े आने में समय लगेगा।
गांव के बीच स्थित मंदिर सुरक्षित बच गया, लेकिन उसके आसपास की लंगर सेवाएं और दुकानें पूरी तरह तबाह हो गईं। चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे के समय लंगर में सैकड़ों लोग मौजूद थे। अभी भी मलबे में दबे लोगों की संख्या तीन अंकों में होने की आशंका जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं। किस्तवाड़ और आसपास के इलाके अब मातम में डूबे हैं, जबकि लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे हैं।









