
अमेरिकी टैरिफ और रूस से कच्चा तेल न खरीदने के बढ़ते दबाव के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी नीतियां बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित से तय होंगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को स्पष्ट कहा कि भारत किसी देश को दुश्मन नहीं मानता, लेकिन अपने किसानों और उद्यमियों के हित से कोई समझौता भी नहीं करेगा।
“स्थायी हित ही स्थायी साथी”
एनडीटीवी डिफेंस समिट 2025 में बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “दुनिया में न तो कोई स्थायी दोस्त होता है, न स्थायी दुश्मन। केवल स्थायी हित होते हैं, और भारत के लिए सबसे बड़ा हित उसके नागरिकों का है।”
आत्मनिर्भरता बनी जरूरत
रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता अब सिर्फ एक विकल्प या विशेषाधिकार नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में हर दिन नई चुनौतियां सामने आती हैं और भारत को उनका सामना अपने दम पर करना होगा।
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख
राजनाथ सिंह ने हालिया ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि यह केवल कुछ दिनों की सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि वर्षों की तैयारी और स्वदेशी तकनीक का नतीजा थी। उन्होंने बताया कि भारतीय सेनाओं ने पूरी रणनीतिक योजना और देसी उपकरणों के दम पर सात अहम टारगेट्स को सफलता से ध्वस्त किया।
भारत का संदेश
रक्षा मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका भारत पर आयात शुल्क कम करने और रूस से ऊर्जा आयात रोकने का दबाव बना रहा है। लेकिन राजनाथ सिंह के बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी नीतियों में किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा।









