: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य (MLC) Chandrakant Raghuvanshi ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे गुट के छह लोकसभा सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर भरोसा जताते हुए पार्टी का दामन थाम लिया है।
हालांकि, इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही उद्धव ठाकरे गुट की ओर से किसी सांसद के दल बदलने की औपचारिक घोषणा की गई है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
गुरुवार को मीडिया से बातचीत में चंद्रकांत रघुवंशी ने कहा कि महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ सफल हुआ है और छह सांसद शिवसेना में शामिल हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि जो भी नेता जनता के लिए काम करना चाहता है, उसे शिवसेना और भाजपा गठबंधन के साथ जुड़ना चाहिए।
इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
2022 जैसे राजनीतिक संकट के संकेत
राजनीतिक गलियारों में पहले से ही ऐसी चर्चाएं चल रही थीं कि Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाली Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray) के नौ सांसदों में से कई सांसद Eknath Shinde के संपर्क में हैं।
यदि भविष्य में ऐसा कोई दल-बदल औपचारिक रूप से होता है तो यह महाराष्ट्र में 2022 जैसी बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल का कारण बन सकता है, जब शिवसेना दो बड़े गुटों में बंट गई थी।
प्रतापराव जाधव ने संजय राउत पर साधा निशाना
इस बीच केंद्रीय मंत्री Prataprao Jadhav ने राज्यसभा सांसद Sanjay Raut पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे उद्धव ठाकरे गुट को नुकसान पहुंच रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सांसदों से जुड़े पत्र का मामला अब लोकसभा अध्यक्ष के पास है और आगे का निर्णय वही करेंगे।
स्थापना दिवस को लेकर भी सियासी संदेश
19 जून को शिवसेना के स्थापना दिवस से पहले प्रतापराव जाधव ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा में विश्वास रखने वाले लोग ही इस अवसर पर एकजुट होंगे।
उनके इस बयान को शिंदे गुट द्वारा खुद को ‘असली शिवसेना’ बताने की राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।








