Add Your Heading Text Here

HomeNATIONALगौरव भाटिया मानहानि केस: दिल्ली हाई कोर्ट का व्यंग्यात्मक पोस्ट पर रोक से इनकार
गौरव भाटिया मानहानि केस: दिल्ली हाई कोर्ट का व्यंग्यात्मक पोस्ट पर रोक से इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने बीजेपी नेता गौरव भाटिया की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें कोर्ट ने हालिया टेलीविजन डिबेट शो में उनके पहनावे को लेकर व्यंग्यात्मक और हास्यपूर्ण सोशल मीडिया पोस्ट को उनकी निजता का हनन नहीं माना. दरअसल, यह व्यंग्यात्मक पोस्ट गौरव भाटिया द्वारा कुर्ता और शॉर्ट्स पहनकर एक लाइव शो में आने के कारण किए गए थे. इस मामले की सुनवाई जस्टिस अमित वंसल कर रहे थे.

कोर्ट ने कहा कि हालांकि आरोपित पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शब्द अपने आप में मानहानि जैसे लग सकते हैं, लेकिन पहली बार में यह व्यंग्य, मजाक जैसे भी लग सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि वादी की निजता का कोई हनन नहीं हुआ है क्योंकि उन्होंने अपनी इच्छा से इस तरह की ड्रेस पहनी थी और लाइव टेलीविजन बहस का हिस्सा बने थे.

सार्वजनिक लोगों के लिए मानहानि की सीमा अधिक हो

इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक हस्तियों या राजनीतिक व्यक्तियों के संबंध में मानहानि की सीमा अधिक होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि ऐसे व्यक्तियों के कार्यों की अक्सर जांच होती है और उन्हें सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ता है. हालांकि, उन्हें एक मंच या मीडिया का लाभ भी मिलता है और साथ ही उनके खिलाफ दिए गए किसी भी बयान का खंडन करने की क्षमता भी होती है.

हालांकि, कोर्ट ने आगे कहा कि संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों में अगर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में कोई अश्लील भाषा का इस्तेमाल करता है, तो वह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं होगा.

सोशल मीडिया पोस्ट को ब्लॉक करने का दिया आदेश

कोर्ट ने 23 सितंबर को भाटिया के मुकदमे की अदालती सुनवाई के बाद, विश पटेल नामक एक ट्विटर उपयोगकर्ता द्वारा की गई आपत्तिजनक पोस्ट को ब्लॉक करने का भी आदेश दिया है. पोस्ट में भाटिया की एक अलग छवि दिखाई गई थी.

सुनवाई के दौरान गौरव भाटिया ने ट्विटर और यूट्यूब से तकरीबन 2 दर्जन लिंक और पोस्ट को ब्लॉक या हटाने की मांग की थी. इसमें न्यूजलॉन्ड्री, पत्रकार अभिसार शर्मा, साथ ही राजनेता रागिनी नायक, सौरभ भारद्वाज, राजकुमार भाटी, सुरेंद्र राजपूत और श्रीनिवास बी.वी. द्वारा प्रकाशित सामग्री शामिल थी.

कोर्ट ने रोक लगाने से किया इंकार

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इनमें से कई राजनीतिक दल, समाचार मीडिया प्लेटफॉर्म, सामाजिक और राजनीतिक टिप्पणीकार और सोशल मीडिया हस्तियों के सदस्य हैं, जो नियमित रूप से अपने विचारों को सार्वजनिक रूप से साझा करते हैं. इसलिए कोर्ट ने कहा कि सिर्फ एक ही पक्ष सुनकर फैसला नहीं सुनाया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि इसके लिए प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए, जिसमें निष्पक्ष टिप्पणी का बचाव भी शामिल है, जिसका इस्तेमाल वह अपने पोस्ट के समर्थन में कर सकते हैं.

सुनवाई के अंत में कोर्ट ने मुकदमे पर सम्मन और अंतरिम राहत आवेदन पर नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर के लिए तय की है.

About Author

Posted By City Home News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *