पंजाब की पूर्व कैबिनेट मंत्री और दीनानगर से कांग्रेस विधायक अरुणा चौधरी ने राज्य में ब्लॉक पंचायत एवं विकास अधिकारियों (बीडीपीओ) की पदोन्नतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस संबंध में पंजाब के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ अकाउंट क्लर्कों को बीडीपीओ जैसे गजटेड पदों पर पदोन्नत किया गया है। उन्होंने इसे सरकारी नीतियों और न्यायिक आदेशों का उल्लंघन बताया। विधायक ने कहा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मनमाने ढंग से अधिकारियों को उच्च पदों का ‘करंट ड्यूटी चार्ज’ देने की प्रथा पर स्पष्ट रूप से रोक लगाई हुई है, इसके बावजूद विभाग द्वारा ऐसी नियुक्तियां जारी हैं। पहले दिया गया गया तथ्यात्मक नहीं था : चौधरी चौधरी ने यह भी उल्लेख किया कि जब यह मामला उनके संज्ञान में आया तो उन्होंने विधानसभा में प्रश्न संख्या 1672 के माध्यम से इसे उठाया था। उस दौरान स्पीकर ने बताया कि विभाग अपने उत्तर में संशोधन करना चाहता है, जिससे यह संकेत मिला कि पहले दिया गया जवाब तथ्यात्मक रूप से सही नहीं था। उन्होंने इसे सदन को गुमराह करने का एक गंभीर मामला बताया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि पहले भी प्रश्न संख्या 1804 के तहत पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर विभाग ने ऐसे कदमों को सही ठहराने की कोशिश की थी, जो पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के डबल बेंच के आदेशों के विपरीत थे। जिम्मेदारी तय करने की मांग विधायक चौधरी ने सरकार से मांग की है कि वह तुरंत विधानसभा के समक्ष सही और पूर्ण तथ्य रखे। उन्होंने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और सरकारी नीतियों की अवहेलना कैसे जारी रहने दी गई। उन्होंने सदन को गुमराह करने और न्यायिक आदेशों की अनदेखी करने के लिए जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की।









