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बेटी से मिले गिफ्ट पर मां को मिला टैक्स नोटिस, अब ITAT ने सुनाया ये फैसला

दिल्ली की एक महिला, जो पेशे से स्कूल टीचर हैं, उन्हें उनकी बेटी ने 3.5 लाख रुपये नकद गिफ्ट दिए, जिसे उन्होंने अपनी ITR में नहीं बताया. इसके बाद आयकर विभाग ने उन्हें नोटिस भेजा. इसके खिलाफ टीचर ने आयकर अपील ट्रिब्यूनल (ITAT), दिल्ली में अपील की. अब इस मामले में ITAT ने फैसला सुनाते हुए शिक्षक की बात मानी और टैक्स विभाग के फैसले को खारिज कर दिया है.

दरअसल, मामला वित्तीय वर्ष 2017-18 का है. इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की एक शिक्षक को उनकी बेटी से 3.5 लाख रुपये नकद गिफ्ट मिले थे, जिसे उन्होंने अपने बैंक में जमा करा दिया था और इसका इस्तेमाल प्रॉपर्टी खरीदने में किया. बाद में टीचर ने अपनी कुल आय 7.4 लाख रुपये के हिसाब से ITR भरा, लेकिन गिफ्ट से मिली रकम का कोई जिक्र नहीं किया. फिर यह पैसा इनकम टैक्स विभाग की नजर में आ गया और उन्होंने इसका पूरा व्योरा मांग लिया.

टैक्स ऑफिसर ने टीचर की बात नहीं मानी

टीचर ने जवाब में बताया कि ये रकम उन्हें उनकी बेटी ने दी है. बेटी की उम्र 25 साल है और वह अभी नौकरी नहीं करती, लेकिन थोड़ी-थोड़ी बचत कर रखती थी. उसने अपनी बचत के पुराने पैसे जमा किए और मां को गिफ्ट दे दिए. लेकिन टैक्स ऑफिसर ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि बेटी के पास इतने पैसे होने के सबूत नहीं हैं. साथ ही यह भी बताया कि बेटी के खाते में जो पैसा जमा हुआ, वह छोटे-छोटे नोटों में था और बार-बार पैसे जमा और निकाले गए थे. अफसरों ने कहा कि अगर किसी के पास पहले से नकद पैसे होते, तो वह यूं बार-बार जमा और निकालने की जरूरत नहीं समझता. आखिरकार अफसरों ने पूरे 3.5 लाख रुपये को अनजाना पैसा मानते हुए उस पर टैक्स लगा दिया.

महिला की अपील से मिला इंसाफ

महिला इस फैसले से नाराज़ होकर आयकर विभाग के एक अधिकारी के पास गई, जिन्होंने फिर से वही पुरानी बातें दोहराईं और टैक्स का फैसला बरकरार रखा. इसके बाद महिला ने दिल्ली के इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) में अपील की. यहां उन्होंने सारे दस्तावेज फिर से जमा किए, जैसे कि गिफ्ट डिक्लेरेशन, बेटी की बैंक स्टेटमेंट, पुराने कैश का हिसाब और बैंक में पैसे जमा करने की पर्चियां. महिला ने कहा कि बेटी ने कई सालों से थोड़ी-थोड़ी रकम बचाकर नकद में रखी थी और उसी से मां को गिफ्ट दिया. उन्होंने यह भी बताया कि बेटी को बैंक में ज्यादा पैसा रखना पसंद नहीं था, इसलिए वह जरूरत पड़ने पर पैसे जमा और निकालती रहती थी.

बेटी को है गिफ्ट देने का हक

ITAT ने इस केस की बारीकी से जांच की और कहा कि बेटी 25 साल की है, बालिग है और कानून के तहत अपनी मर्जी से किसी को भी गिफ्ट दे सकती है. ट्रिब्यूनल ने माना कि मां-बेटी के रिश्ते में ऐसा गिफ्ट देना बिल्कुल सामान्य बात है. अगर बेटी ने पैसे बचाकर मां को गिफ्ट दिया है, तो सिर्फ इस वजह से शक नहीं किया जा सकता कि वह अमीर नहीं है. ITAT ने कहा कि टैक्स अफसरों ने रिश्ते और गिफ्ट की भावना को नजरअंदाज किया. उन्होंने सभी पुराने फैसलों को रद्द कर दिया और टैक्स की रकम हटाते हुए कहा कि यह पैसा वैध है और इस पर कोई टैक्स नहीं बनता.

गिफ्ट पर नहीं लगेगा टैक्स लेकिन सबूत ज़रूरी

वहीं इस मामले पर टैक्स मामलों के जानकार डॉ. सुरेश सुराना ने बताया कि इनकम टैक्स कानून के मुताबिक अगर कोई गिफ्ट रिश्तेदार से मिला है, तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगता. मां-बेटी का रिश्ता उसी दायरे में आता है. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि गिफ्ट मिलने पर उसका सबूत होना बहुत ज़रूरी है. मसलन, गिफ्ट की लिखित घोषणा, बैंक का लेन-देन, और गिफ्ट देने वाले की आय की स्थिति. नकद लेन-देन से अक्सर शक होता है, इसलिए गिफ्ट बैंक ट्रांसफर से देना बेहतर होता है.

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Posted By City Home News

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