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कौन बनेगा 125 लाख करोड़ रुपए का वारिस? अब ये संभालेंगे अंबानी से अडानी तक का कारोबार

भारत के कॉर्पोरेट घरानों में इस समय एक बड़ा बदलाव चल रहा है. देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों के मालिक अब अपनी विरासत अगली पीढ़ी को सौंपने की तैयारी में हैं. पोर्ट्स, हवाई अड्डे, तेल रिफाइनरी, रियल एस्टेट, आईटी, FMCG जैसी बड़ी इंडस्ट्रीज अब नए हाथों में जाने वाली हैं. अनुमान है कि 2024 से 2030 तक करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 125 लाख करोड़ रुपए) की संपत्ति अगली पीढ़ी को सौंप दी जाएगी.

अडानी ग्रुप की अगली पीढ़ी तैयार

देश के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में से एक गौतम अडानी, पहले ही उत्तराधिकार की योजना बना चुके हैं. ब्लूमबर्ग के अनुसार, उन्होंने तय किया है कि वह 70 साल की उम्र में रिटायर होंगे और अपने कारोबार को चार वारिसों में बांटेंगे बेटे करण और जीत और भतीजे प्रणव और सागर.

करण अडानी बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स का संचालन कर रहे हैं. प्रणव अडानी खाद्य तेल, ऑयल और रियल एस्टेट में सक्रिय हैं. सागर अडानी ग्रीन एनर्जी में नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि जीत अडानी हवाई अड्डा और डिजिटल बिज़नेस देख रहे हैं. परिवार की महिलाएं भी पीछे नहीं हैं सागर की पत्नी सृष्टि और जीत की पत्नी दिवा को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं.

अंबानी: तीन वारिस, तीन साम्राज्य

रिलायंस के प्रमुख मुकेश अंबानी ने 2023 में अपने तीनों बच्चों को बोर्ड में शामिल कर दिया. ईशा अंबानी को रिटेल सेक्टर, आकाश अंबानी को जियो (टेलीकॉम) और अनंत अंबानी को हरित ऊर्जा की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

गोदरेज ग्रुप का बंटवारा

127 साल पुराने गोदरेज ग्रुप ने 2024 में आपसी सहमति से अपने साम्राज्य को दो भागों में बांट दिया. आदि और नादिर गोदरेज ने इंडस्ट्री व प्रोडक्ट बिज़नेस संभाले, जबकि जमशेद और स्मिता ने रियल एस्टेट और गोदरेज एंड बॉयस का जिम्मा लिया. आदि के बेटे पिरोजशा और जमशेद की बेटी न्यारिका भविष्य की कमान संभाल रहे हैं.

मिस्त्री परिवार में बदलाव

शापूरजी पलोनजी ग्रुप में उत्तराधिकार की प्रक्रिया काफी शांत और रणनीतिक रही है. शापूर मिस्त्री ने अपने बेटे पलोन और दिवंगत भाई साइरस मिस्त्री के बेटों फिरोज और ज़हान को ग्रुप में शामिल किया है. ये अब कंपनी के भविष्य की रणनीति और गवर्नेंस पर काम कर रहे हैं.

शिव नादर: बेटी को सौंपा साम्राज्य

एचसीएल के संस्थापक शिव नादर ने औपचारिक रूप से अपनी हिस्सेदारी बेटी रोशनी नादर को सौंप दी है. रोशनी अब एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ की चेयरपर्सन हैं और कंपनी की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर भी हैं.

मोदी परिवार: विरासत बनी जंग

सभी परिवारों में यह प्रक्रिया सहज नहीं होती. केके मोदी ग्रुप में 2019 में उनके निधन के बाद बीना मोदी और उनके बेटे समीर व ललित मोदी के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हो गई. बीना मोदी को हाल ही में फिर से कंपनी का एमडी चुना गया, लेकिन पारिवारिक कलह अभी भी जारी है.

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Posted By City Home News

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