
पंजाब विधानसभा का माहौल आज उस समय गर्म हो गया जब विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी आम आदमी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। बाजवा ने कहा कि मौजूदा सरकार ने राज्य की राजनीति को “बदले की प्रयोगशाला” और “सस्ते राजनीतिक तमाशे” में बदल दिया है।
विवाद का केंद्र बना सनौर से आप विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा के खिलाफ दर्ज एफआईआर। बाजवा का दावा है कि इस मामले ने न सिर्फ सत्ताधारी दल के भीतर की नैतिक गिरावट को उजागर किया है बल्कि यह भी दिखाया है कि भगवंत मान की अगुवाई में न्याय व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
बाजवा ने आरोप लगाया कि एफआईआर में दर्ज अपराध की अवधि 2014 से जून 2024 के बीच की बताई गई है और शिकायत सितंबर 2022 में दी गई थी। बावजूद इसके, लगभग तीन सालों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। “सरकार आखिर क्यों चुप रही? कार्रवाई क्यों नहीं की गई? और अब अचानक सितंबर 2025 में गिरफ्तारी क्यों हुई?” उन्होंने सवाल उठाया।
विपक्ष के नेता का कहना है कि पठानमाजरा को उस वक्त निशाना बनाया गया जब उन्होंने खुद मुख्यमंत्री के कामकाज और नीतियों पर सवाल उठाए। “यह न्याय नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध है। सरकार शिकायतों का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रही है और असहमति जताने वालों को डराने का हथियार बना रही है,” बाजवा ने कहा।
उन्होंने आगे कहा कि यह घटनाक्रम दो अहम पहलुओं को सामने लाता है। पहला, सरकार की आम नागरिकों के लिए न्याय देने की प्रतिबद्धता शून्य है। दूसरा, मुख्यमंत्री भगवंत मान विरोधी आवाज़ों को दबाने के लिए राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
बाजवा ने तीखे अंदाज में कहा, “पंजाब को ऐसे मुख्यमंत्री की ज़रूरत नहीं है जो जनता के दर्द को राजनीतिक शो बना दे। राज्य को चाहिए न्याय, निष्पक्षता और ईमानदार शासन—ना कि कॉमेडी सर्कस।”









