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HomeBusinessGST 2.0 से बढ़ेगी देश के विकास की रफ्तार, लेकिन ये है सबसे बड़ी दिक्कत
GST 2.0 से बढ़ेगी देश के विकास की रफ्तार, लेकिन ये है सबसे बड़ी दिक्कत

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की हाल ही में घोषित वस्तु एवं सेवा कर (GST) में बदलाव को लेकर अपनी राय दी है. उनके अनुसार, यह नया GST स्ट्रक्चर खरीदारी को बढ़ावा देगा, जिससे विकास को ताकत मिलेगी. लेकिन साथ ही इस बदलाव से सरकार की आमदनी पर असर पड़ेगा और राजकोषीय यानी वित्तीय घाटा बढ़ने की संभावना भी है. इसका मतलब है कि सरकार को अपने खर्च और कर्ज को नियंत्रित करने में दिक्कत हो सकती है.

मिडिल क्लास को होगा फायदा

सरकार ने 3 सितंबर को GST की दरों को पहले के चार स्तरों से घटाकर केवल तीन मुख्य दरों में बांटने का फैसला किया है. अब 5% और 18% दो सामान्य दरें होंगी, जबकि कुछ खास लग्जरी और महंगी वस्तुओं पर 40% की नई दर लागू की जाएगी. यह बदलाव 22 सितंबर से लागू होगा. मूडीज का कहना है कि यह सुधार छोटे और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचाएगा और कई उद्योगों की बिक्री बढ़ाएगा.

रेवेन्यू पर आ सकता है संकट

हालांकि, मूडीज ने यह भी चेतावनी दी है कि सरकार को इस बदलाव के कारण कर राजस्व में कमी का सामना करना पड़ सकता है. सरकार ने अनुमान लगाया है कि इस साल करीब 48,000 करोड़ रुपए का कर राजस्व कम हो सकता है, लेकिन मूडीज का मानना है कि यह घाटा इससे भी ज्यादा हो सकता है क्योंकि नया GST ढांचा अगले साल पूरे वित्त वर्ष के लिए लागू रहेगा. इस वजह से सरकार के वित्तीय दबाव बढ़ेंगे और कर्ज कम करने में मुश्किल होगी.

इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हाल के केंद्रीय बजट में कुछ कर सुधार, जैसे आयकर छूट बढ़ाना, भी रेवेन्यू बढ़ने में रुकावट डालेंगे. भारत का कर्ज स्तर अभी भी बहुत ज्यादा है और सरकार को ब्याज भुगतान में भी भारी रकम खर्च करनी पड़ती है. 2024-25 में सरकार के कुल राजस्व का लगभग 23% हिस्सा केवल ब्याज चुकाने में जाएगा जो कि बहुत अधिक है. कुल मिलाकर, GST सुधार सरकार के विकास और उपभोग को बढ़ावा देने वाले लक्ष्य के अनुरूप हैं. लेकिन साथ ही सरकार को वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए सावधानी बरतनी होगी ताकि यह बदलाव राजकोषीय संकट में न बदल जाए.

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Posted By City Home News

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