
भारत की ओर से दी गई बाढ़ चेतावनी ने पाकिस्तान को सतर्क कर दिया है। पाकिस्तान ने स्वीकार तो किया है कि उसे चेतावनी मिली है, लेकिन साथ ही यह दावा भी किया है कि भारत ने यह अलर्ट सिंधु जल संधि (IWT) के तहत दिया है। दिलचस्प बात यह है कि भारत पहले ही पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि को निलंबित करने का ऐलान कर चुका है।
विशेषज्ञों के मुताबिक सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे का आधार है। इसके अनुसार भारत को सतलुज, ब्यास और रावी का पानी इस्तेमाल करने का अधिकार है, जबकि पाकिस्तान सिंधु, झेलम और चिनाब पर निर्भर है। दशकों से चले आ रहे तनाव और तीन युद्धों के बावजूद यह समझौता कायम रहा, लेकिन पहलगाम हमले के बाद भारत ने इसे रोक दिया था और पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था।
उधर, पाकिस्तान का कहना है कि भारत की यह चेतावनी संधि का हिस्सा है, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि संधि बहाल हो चुकी है।
इसी बीच, पाकिस्तान का पंजाब प्रांत बाढ़ जैसे हालात से जूझ रहा है। लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार पिछले 24 घंटों में करीब 20,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। वहीं, बीते छह हफ्तों में अब तक 120 लोगों की मौत दर्ज की जा चुकी है।
पंजाब इमरजेंसी रेस्क्यू सर्विस 1122 के प्रवक्ता फारूक अहमद ने बताया कि शनिवार से जिन इलाकों से लोगों को निकाला गया है, वे मुख्यतः सिंधु, चिनाब, रावी, सतलुज और झेलम नदियों के किनारे बसे गांव हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अगले 48 घंटों तक बारिश का सिलसिला जारी रहा तो नदियों का जलस्तर और बढ़ेगा तथा स्थिति और गंभीर हो सकती है।









