
नई दिल्ली – ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद भारतीय सेना और नौसेना दोनों ने अपनी युद्ध तैयारियों को और धार देने का निर्णय लिया है। भारतीय नौसेना इस दिशा में सबसे तेज़ी से आगे बढ़ रही है और अपने युद्धपोतों के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दे रही है। नेवी का लक्ष्य है कि साल 2030 तक वह एक साथ 300 ब्रह्मोस मिसाइलें दागने में सक्षम हो।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर हुए हमले ने दुनिया का ध्यान भारतीय मिसाइल क्षमता की ओर खींचा था। उस समय ब्रह्मोस मिसाइल ने जिस तरह सटीक निशाना साधकर लक्ष्य को तबाह किया, उसने भारतीय सेनाओं की ताकत का परिचय दे दिया। ब्रह्मोस के हर संस्करण ने भारतीय रक्षा तंत्र को और मजबूत बनाया है।
अब नौसेना को दो नए स्टील्थ फ्रिगेट – उदयगिरि और हिमगिरि मिलने जा रहे हैं। ये युद्धपोत अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं और ब्रह्मोस मिसाइल से फायरिंग करने में सक्षम होंगे। इनकी तैनाती के बाद भारतीय नौसेना के पास कुल 14 गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट हो जाएंगे। प्रत्येक फ्रिगेट में 8 वर्टिकल लॉन्च ब्रह्मोस एंटी-शिप लॉन्चर लगाए गए हैं।
तलवार क्लास युद्धपोत, जिन्हें 2003 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था, वर्तमान में 6 की संख्या में सक्रिय हैं। इनमें से 4 को पहले ही ब्रह्मोस से लैस किया जा चुका है जबकि बाकी 2 पर काम तेजी से चल रहा है।
इसके अलावा, 2016 में भारत और रूस के बीच हुए समझौते के तहत 4 नए तलवार क्लास युद्धपोत बनाए जा रहे हैं। इनमें से तुषिल और तमाल को पहले ही नेवी में शामिल किया जा चुका है, जबकि बाकी दो जहाज जल्द ही बेड़े का हिस्सा बनने वाले हैं।









