
पंजाब और उत्तरी भारत के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई है। राज्य के सभी 23 जिलों में बाढ़ ने अपनी चपेट में लिया है, और अब तक इस आपदा में 30 लोगों की मौत हो चुकी है। भगवंत मान सरकार ने राज्य को आपदा प्रभावित घोषित कर दिया है।
बीती रात भी अधिकांश शहरों में भारी बारिश हुई, जिससे कई इलाके जलमग्न हो गए। मौसम विभाग ने पठानकोट, गुरदासपुर, मुकेरियां, जालंधर, लुधियाना, मोगा और संगरूर समेत कई जिलों में ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है।
यमुना नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, जिससे दिल्ली और आसपास के निम्न क्षेत्रों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। इस पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से राहत पैकेज की मांग की है।
राज्य के आठ जिलों के 1300 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। लोग छतों पर या सुरक्षित स्थानों पर शरण ले रहे हैं। लगभग दो लाख एकड़ फसलें पानी में डूब चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार अगस्त महीने में रिकॉर्ड 253.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य औसत 146.2 मिलीमीटर से 74 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल और जम्मू में भारी बारिश के कारण छोड़े गए डैमों का पानी भी पंजाब में बाढ़ की बड़ी वजह बना है।









