
नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी की नई मिसाल पेश करते हुए एक अहम आदेश जारी किया है। अदालत ने ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ के होस्ट समय रैना समेत पाँच लोकप्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को अपने पॉडकास्ट और कार्यक्रमों में दिव्यांग और दुर्लभ जेनेटिक बीमारियों से पीड़ित लोगों का मज़ाक उड़ाने के लिए बिना शर्त सार्वजनिक माफ़ी माँगने का निर्देश दिया है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि इस तरह के आपत्तिजनक कंटेंट को मौलिक अधिकारों की आड़ में जायज़ नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि व्यावसायिक लाभ के लिए किया गया या प्रतिबंधित श्रेणी में आने वाला भाषण संविधान की सुरक्षा के दायरे में नहीं आता।
बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि, “पछतावे का स्तर हमेशा अपराध के स्तर से अधिक होना चाहिए।” अदालत के इस निर्देश को सोशल मीडिया जगत के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है, ताकि मनोरंजन की आड़ में संवेदनशील समुदायों के साथ भेदभाव या मज़ाक न हो।









