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पूर्णिया: किसी के सीने में तो किसी के पेट में लगे तीर, जमीन विवाद में खूनी संघर्ष, छावनी बना गांव

बिहार के पूर्णिया में जमीन विवाद में दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई. जमीन के पैसों को लेकर हुए विवाद में तीर से वार किए किए. यही नहीं इस विवाद में गोलियां तक चलाने का आरोप है. ये मामला रघुवंश नगर ओपी थाना क्षेत्र के हनुमान नगर से सामने आया है, जहां 35 डिसमिल सूद भरना वाली जमीन को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ, जिसमें दो लोग तीर लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए. इस घटना के बाद गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है.

दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. दोनों घायल चचेरे भाई बताए जा रहे हैं. दोनों के शरीर में तीर लगा. किसी के पेट तो किसी के सीने में तीर लगा, जिसे डॉक्टरों ने काफी मशक्कत के बाद निकाला. वहीं घटना की सूचना पर मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक आरोपी मौके से फरार हो गया था. हालांकि, बाद में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. इस घटना के बाद गांव मे तनाव का माहौल है. फिलहाल सभी घायलों का पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है.

4 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था

घायलों की पहचान अनवर और फिरोज के रूप हुई, जो अब खतरे से बाहर हैं. फिरोज का त्रिलोकी मंडल से 35 डिसमिल सूद भरना वाली जमीन को लेकर विवाद चल रहा था. फिरोज ने इसी मामले को लेकर त्रिलोकी मंडल समेत 4 लोगों के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करा दिया था, जिसको लेकर त्रिलोकी मंडल का फिरोज से उसी के घर पर झगड़ा हो गया था. इसी झगड़े में तीर लगने से अनवर और फिरोज घायल हो गए. इसके साथ ही आरोप है कि विवाद के दौरान त्रिलोकी मंडल के बेटे फायरिंग करते हुए भागे थे. हालांकि, फायरिंग की बात से पुलिस ने इनकार किया गया है.

10 साल पहले गिरवी रखी थी 35 डिसमिल जमीन

फिरोज की बेटी ने कहा कि गांव के ही शंकर नाम के शख्स ने उन्हें बताया कि त्रिलोकी और फिरोज, अनवर के बीच जमीन के रूपये के लेन-देन को लेकर मारपीट हो गई है. जब हम मौके पर पहुंचे तो देखा कि पापा और चाचा तीर लगने से घायल होकर जमीन पर पड़े थे. मो. अनवर के भाई मो. बबलू उर्फ मो. शोहराब ने बताया कि करीब दस साल पहले त्रिलोकी मंडल ने फिरोज से 35 डिसमिल जमीन गिरवी रखकर 20 हजार रुपये लिए थे. इसमें से फिरोज ने 10 हजार रुपये लौटा दिए थे, जबकि 10 हजार रुपये बाकी थे, लेकिन त्रिलोकी मंडल उसे स्वीकार नहीं कर रहे थे.

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Posted By City Home News

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