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सोनम वांगचुक का NGO क्या करता है, क्यों कैंसिल हुआ लाइसेंस? विदेशी फंडिंग पर लग गई रोक

Sonam Wangchuk: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के एनजीओ (NGO) और विदेशी फंडिंग से जुड़ी गतिविधियों पर सवाल उठे हैं. CBI ने भी इस मामले की जांच शुरू की है. एनजीओ का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है. वांगचुक ने इसे बदले की कार्रवाई बताते हुए कहा, प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा का दोष उन पर मढ़ा गया है.

आइए, इसे बहाने जानते हैं कि वांगचुक का संगठन क्या करता है? कब और कैसे एनजीओ की शुरुआत हुई? FCRA क्या है? देश में किसी भी एनजीओ को विदेशी चन्दा लेने के नियम क्या हैं?

हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL)

सोनम वांगचुक ने 1994 में स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की स्थापना की. इसका मकसद लद्दाख के युवाओं को स्थानीय जरूरतों और संस्कृति से जोड़ते हुए प्रासंगिक और व्यावहारिक शिक्षा देना था. बाद में इसी सोच के विस्तार के रूप में उन्होंने हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की नींव रखी. SECMOL की नींव 1994 में रखी गई ताकि बच्चे केवल कागजी डिग्री के बोझ तले न दबें बल्कि वास्तविक जीवन कौशल भी सीखें.

HIAL लगभग 2017-18 में आकार लेता है, जिसके पीछे विचार था लद्दाख और हिमालयी क्षेत्र के लिए ऐसे समाधान खोजना जो पर्यावरण-संवेदनशील हों. इसका स्पष्ट उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिकी और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों का स्थानीय अनुभवों के आधार पर हल निकालना तय किया गया था.

What Sonam Wangchuk Works For

FCRA क्या है?

  • भारत में कई एनजीओ विदेशी फंडिंग पर निर्भर हैं. लेकिन यह फंडिंग सीधे नहीं आ सकती. इसके लिए कानून बनाया गया है.
  • Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) पहली बार 1976 में लागू हुआ और बाद में 2010 में संशोधित हुआ.
  • इसके तहत कोई भी एनजीओ विदेशी फंड लेना चाहता है तो उसे सरकार से FCRA पंजीकरण कराना अनिवार्य है.

Fcra Foreign Funding Law For Ngo In India

वांगचुक के एनजीओ का लाइसेंस क्यों कैंसिल हुआ?

सरकार और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, SECMOL और HIAL से जुड़े पंजीकरण में कथित अनियमितताएं सामने आने के बाद इनकी अनुमतियां रद की गईं. इसके मुख्य कारण कुछ इस प्रकार बताए गए.

  • कई बार रिपोर्टिंग में आवश्यक जानकारी समय पर जमा नहीं की गई
  • प्राप्त फंड के उपयोग और घोषित उद्देश्यों में असंगति बताई गई.
  • सरकार का तर्क है कि विदेशी चंदे के उपयोग की पारदर्शिता नहीं है.
  • नतीजा यह हुआ कि गृह मंत्रालय ने FCRA लाइसेंस नवीनीकरण को रद्द कर दिया.
  • लाइसेंस कैंसिल होने का मतलब यह है कि अब संगठन सीधे विदेशी दान नहीं ले सकता.
  • उन्हें केवल घरेलू फंड, डोनेशन, या CSR से ही काम चलाना होगा.

लाइसेंस कैसे वापस मिलेगा?

  • भारत में FCRA पंजीकरण दोबारा पाने का प्रावधान तय है.
  • संगठन को सबसे पहले उन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण देना होगा जिनके चलते रद्दीकरण हुआ.
  • गृह मंत्रालय को पुनर्विचार के लिए आवेदन किया जा सकता है.
  • अगर फंडिंग के उपयोग में कोई आपराधिक मामला नहीं है तो सुधारात्मक कदम उठाकर दोबारा पंजीकरण संभव है.
  • कोर्ट की शरण में भी जाया जा सकता है यदि लगे कि कैंसिलेशन अनुचित था.
  • पारदर्शी अकाउंटिंग और नियमित रिपोर्टिंग को मजबूत कर संगठन अपनी विश्वसनीयता फिर से बना सकता है.
Sonam Wangchuk.

सोनम वांगचुक

CBI जांच क्यों शुरू हुई?

एनजीओ के विदेशी चंदे और उसके इस्तेमाल को लेकर शिकायतें सरकार तक पहुंची. आरोप है कि कुछ राशि का उपयोग घोषित उद्देश्यों से इतर हुआ है. FCRA उल्लंघन के मामलों में CBI जांच सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है. हालांकि, अभी यह जांच शुरुआती स्तर पर है और अंतिम निर्णय सामने आना बाकी है. यह केवल जांच है. सीबीआई ने कोई केस नहीं दर्ज किया है.

वांगचुक अकेले नहीं, कई लाइसेंस रद्द किए गए

यह मामला केवल सोनम वांगचुक के एनजीओ का नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में हजारों एनजीओ का FCRA लाइसेंस रद्द किया गया है, जिनमें छोटे संगठनों से लेकर बड़े नाम भी शामिल हैं. सरकार का तर्क है कि विदेशी फंडिंग का दुरुपयोग राष्ट्रहित के खिलाफ हो सकता है. दूसरी ओर कई सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि नियम इतने सख्त हैं कि काम कर रहे संगठनों का दम घुटने लगता है.

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Posted By City Home News

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