नई दिल्ली: मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने बड़ा दावा किया है। सरकार ने अदालत से कहा कि Telegram केवल एक मैसेजिंग ऐप नहीं रह गया है, बल्कि कई मामलों में यह आतंकवादी गतिविधियों, संगठित अपराध और अवैध नेटवर्क के लिए एक सुविधाजनक माध्यम बन चुका है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि प्लेटफॉर्म की कुछ विशेषताएं, जैसे बड़े चैनल, गुमनाम पहचान और तेजी से कंटेंट फैलाने की क्षमता, इसका दुरुपयोग करने वालों के लिए मददगार साबित हो रही हैं। सरकार का कहना है कि ऐसे नेटवर्क की पहचान करना और उन पर कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
दरअसल, यह मामला Telegram द्वारा सरकार के अस्थायी प्रतिबंध को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देने के बाद सामने आया है। Telegram का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई करोड़ों आम यूजर्स के अधिकारों को प्रभावित करती है और यह कदम अनुपातहीन है।
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि उसके पास ऐसे दस्तावेज और सबूत हैं जो यह दिखाते हैं कि प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल गंभीर गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। सरकार ने कहा कि वह अगली सुनवाई में इससे जुड़े विस्तृत तथ्य पेश करेगी।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में NEET-UG 2026 री-एग्जाम भी है। सरकार का आरोप है कि कुछ संगठित गिरोह Telegram के जरिए छात्रों को फर्जी दावे, पेपर लीक और धोखाधड़ी के जाल में फंसा रहे थे, जिसके बाद प्लेटफॉर्म पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला लिया गया। यह रोक फिलहाल 22 जून तक लागू की गई थी।
वहीं Telegram के संस्थापक Pavel Durov ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे 15 करोड़ से ज्यादा भारतीय यूजर्स प्रभावित हुए हैं, जबकि गलत काम करने वाले लोग दूसरे प्लेटफॉर्म पर चले गए हैं।
अब सबकी नजर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी है, क्योंकि यह मामला केवल एक ऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे बड़े सवालों से भी जुड़ा हुआ है।








