पंजाब में कांग्रेस की गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। हलका आतम नगर से कमलजीत सिंह कड़वल की सदस्यता कांग्रेस पार्टी द्वारा रद्द किए जाने का एक लेटर वायरल हुआ है। यह लेटर 19 जून 2025 का है, लेकिन यह वायरल अब हुआ है। सदस्यता रद्द किए जाने का लेटर वायरल होने के बाद भी कमलजीत कड़वल ऑब्जर्वर मीटिंग में बैठे नजर आए। जिला कांग्रेस प्रधान संजय तलवाड़ से जब इस वायरल लेटर के बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि अभी उन्हें इस मामले का कुछ ज्यादा पता नहीं है। लेटर के बारे में वह अपने दफ्तर में चेक करवाएंगे। यहां बता दें कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पहले ही स्पष्ट किया हुआ है कि कांग्रेस पार्टी के प्रोटोकॉल के विपरीत कड़वल की नियुक्ति की गई है। वड़िंग ने कहा था कि कड़वल को कांग्रेस में शामिल करने से पहले उन्हें किसी ने जानकारी नहीं दी। इस कारण वह कड़वल को कांग्रेस का सदस्य मानते ही नहीं हैं। दिल्ली में हाईकमान ने करवाई थी सुलह 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी के नेताओं को दिल्ली बुलाकर आपसी मतभेद खत्म करने की कोशिश की। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश अध्यक्ष और लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच सुलह कराई गई। गुटबाजी खत्म करने के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त पार्टी में निचले स्तर पर चल रही गुटबाजी को खत्म करने और कमजोर जिला इकाइयों को मजबूत करने के लिए हाईकमान ने विभिन्न जिलों में केंद्रीय और प्रदेश स्तरीय ऑब्जर्वर नियुक्त किए। इसी क्रम में लुधियाना में गुटबाजी खत्म करने के लिए शहरी हलकों के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ ऑब्जर्वर कृष्णा तीरथ ने बैठक की। बैठक में पार्टी के विभिन्न पदाधिकारी और वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जिला और प्रदेश अध्यक्ष की कार्यशैली की जानकारी लेना और आपसी मतभेद दूर करने के सुझाव लेना था। इस बैठक में कमलजीत सिंह कड़वल भी मौजूद थे, जिन्हें राजा वड़िंग ने कभी कांग्रेस का सदस्य माना ही नहीं। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में शामिल कई नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि एक तरफ पार्टी हाईकमान गुटबाजी खत्म करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी से निष्कासित व्यक्ति को बैठक में शामिल किया जा रहा है। लुधियाना में गुटबाजी खत्म करना चुनौती सूत्रों के अनुसार, लुधियाना के पश्चिमी हलके में कमजोर हो रहे आधार के कारण दिल्ली में पार्टी हाईकमान ने बैठक की थी। उप-चुनाव की हर गतिविधि की समीक्षा की गई। वहीं, पार्टी हाईकमान ने पूर्व विधायक सिमरजीत सिंह बैंस को पटियाला जिले का ऑब्जर्वर नियुक्त कर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। कई कांग्रेसी नेताओं ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि अगर लुधियाना में पार्टी से निकाले गए लोगों को इसी तरह बैठकों में शामिल किया जाता रहा, तो आने वाले समय में गुटबाजी खत्म होने के बजाय और बढ़ सकती है। हाईकमान के फैसले पर नजर अब देखना यह है कि कांग्रेस हाईकमान लुधियाना कांग्रेस की गुटबाजी को लेकर क्या फैसला लेती है। पार्टी के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय है, जहां एक तरफ प्रदेश के अन्य जिलों में एकता का माहौल है, वहीं लुधियाना में गुटबाजी पार्टी के लिए सिरदर्द बनती जा रही है।









