
One of the three indictments centres on jailed Punjab gangster Lawrence Bishnoi. (File Photo)
वॉशिंगटन/कैलिफोर्निया/नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर फैले संगठित अपराध के खिलाफ एक ऐतिहासिक और अब तक की सबसे बड़ी साझा कार्रवाई में, अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने भारत आधारित कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग और दो अन्य बड़े आपराधिक सिंडिकेट्स की कमर तोड़ दी है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) और फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने इस महा-अभियान को ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ (Operation Hard Ball) कोडनेम दिया था। इसके तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई देशों में एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी कर 24 खूंखार अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 10 अंतरराष्ट्रीय भगोड़े अब भी रडार पर हैं।
इस बड़े पैमाने पर चलाए गए ऑपरेशन के दौरान 50 से अधिक स्थानों पर तलाशी वारंट तामील किए गए, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 1,000 किलोग्राम (1 टन) उच्च गुणवत्ता वाली कोकीन, 1 किलोग्राम हेरोइन, 12 अत्याधुनिक हथियार और भारी मात्रा में नकदी जब्त की गई है।
1. जेल से ग्लोबल एम्पायर चला रहा था लॉरेंस बिश्नोई: अमेरिकी DOJ का बड़ा खुलासा
अमेरिकी अदालत में दायर तीन अलग-अलग फेडरल इंडिक्टमेंट्स (संघीय अभियोगों) में से सबसे मुख्य आरोप पत्र भारत की जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर केंद्रित है। अमेरिकी अभियोजकों (Prosecutors) ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि लॉरेंस बिश्नोई भारतीय जेल के अंदर से ही प्रतिबंधित मोबाइल फोन, इंटरनेट-आधारित एन्क्रिप्टेड कॉलिंग ऐप्स और अत्याधुनिक संचार उपकरणों का उपयोग करके दुनिया भर में फैले एक विशाल आपराधिक नेटवर्क को निर्देशित कर रहा था।
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, बिश्नोई के इशारे पर विभिन्न देशों में राजनीतिक हत्याएं, जबरन वसूली (Extortion), अपहरण, ड्रग तस्करी, हथियारों की अवैध सप्लाई और मानव तस्करी (Human Smuggling) जैसी संगीन वारदातों को अंजाम दिया जा रहा था।
विदेश में बैठे दो बड़े मोहरे: गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा
इस इंडिक्टमेंट में लॉरेंस बिश्नोई के दो सबसे खास और कुख्यात गुर्गों को नामजद किया गया है:
- गोल्डी बराड़ (Goldy Brar): अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इसे बिश्नोई सिंडिकेट का ‘नॉर्थ अमेरिकन लीडर’ (उत्तर अमेरिकी प्रमुख) घोषित किया है, जो अमेरिका और कनाडा में पूरे गैंग का ऑपरेशन संभालता है।
- रोहित गोदारा (Rohit Godara): इसे यूरोप में बिश्नोई गैंग की कमान संभालने वाला मुख्य सिंडिकेट लीडर बताया गया है, जो वहीं बैठकर लॉरेंस के इशारे पर रंगदारी और हत्याओं की साजिश रचता है।
2. जून 2023 में कनाडा में हुई हाई-प्रोफाइल राजनीतिक हत्या का कनेक्शन आया सामने
अमेरिकी चार्जशीट में एक और बेहद चौंकाने वाला और गंभीर दावा किया गया है। अभियोजकों का आरोप है कि जून 2023 में कनाडा के सरे (Surrey, British Columbia) में एक प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक नेता की जो दिन-दहाड़े हत्या की गई थी, उसकी सीधी सुपारी और आदेश भारत की जेल से लॉरेंस बिश्नोई और कनाडा में बैठे गोल्डी बराड़ ने दिया था। हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा है कि ये आरोप अभी अदालत के समक्ष हैं और मुकदमे के दौरान कानूनी तौर पर परखे जाएंगे।
भारतीय प्रवासियों (Indian Diaspora) को निशाना बनाता था गैंग
जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट विदेशों—विशेषकर अमेरिका और कनाडा—में रहने वाले संपन्न भारतीय प्रवासियों और व्यापारियों को डराने-धमकाने के लिए क्रूर हिंसा का सहारा लेता था। अपनी दहशत को और बढ़ाने के लिए ये लोग सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट डालकर वारदातों की जिम्मेदारी लेते थे, ताकि उनके नाम का खौफ बना रहे और रंगदारी वसूलना आसान हो।
3. ड्रग्स और जबरन वसूली का इंटरनेशनल नेटवर्क: कैसे काम करता था सिंडिकेट?
अमेरिकी जांचकर्ताओं के अनुसार, बिश्नोई गैंग अपने अंतरराष्ट्रीय साम्राज्य को चलाने के लिए मुख्य रूप से दो रास्तों से पैसा कमा रहा था—अंतरराष्ट्रीय कोकीन तस्करी और करोड़ों रुपये की रंगदारी।
- एन्क्रिप्टेड ऐप्स से धमकियां: गैंग के सदस्य व्हाट्सएप (WhatsApp) और सिग्नल जैसे सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए दुनिया भर के कारोबारियों को धमकी भरे मैसेज भेजते थे। उनसे लाखों डॉलर्स की मांग की जाती थी और पैसे न देने पर उनके और भारत में रह रहे उनके परिवारों को जान से मारने की चेतावनी दी जाती थी।
- प्रतिद्वंद्वी गैंग्स से कोकीन की लूट: जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि बिश्नोई का यह नेटवर्क अमेरिका और कनाडा के बीच बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों की तस्करी को नियंत्रित करता था। इतना ही नहीं, यह गैंग दूसरे प्रतिद्वंद्वी ड्रग्स तस्करों के कोकीन शिपमेंट्स को रास्ते में ही लूट लेता था और फिर उसे अपने नेटवर्क के जरिए बाजार में बेचता था।
4. दो अन्य बड़े सिंडिकेट्स पर भी गिड़ी गाज: जग्गू भगवानपुरिया नेटवर्क का खात्मा
लॉरेंस बिश्नोई के अलावा, इस ऑपरेशन में दो और बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया है:
दूसरा इंडिक्टमेंट: जग्गू भगवानपुरिया गैंग
दूसरा फेडरल अभियोग जग्गू भगवानपुरिया संगठन के खिलाफ है। अमेरिकी प्रॉसिक्यूटर्स के मुताबिक, यह भी भारत आधारित एक बेहद खतरनाक आपराधिक सिंडिकेट है, जिसके पैर अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (UK), यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक फैले हुए हैं। यह गैंग पैसे लेकर हत्याएं करने (Murder-for-hire), अपहरण, हथियारों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय ड्रग स्मगलिंग में शामिल था। सबसे गंभीर आरोप यह है कि यह संगठन भारत में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों का इस्तेमाल कर अपने विरोधियों को निशाना बनाता था और अपने अवैध धंधों को अंजाम देता था।
तीसरा इंडिक्टमेंट: रविंदर सिंह ढांडा का नेटवर्क
तीसरा अभियोग कनाडा आधारित एक बड़े ड्रग स्मगलिंग नेटवर्क पर चलाया गया है, जिसका नेतृत्व रविंदर सिंह ढांडा कर रहा था। यह ग्रुप दक्षिणी कैलिफोर्निया से कनाडा में बड़े पैमाने पर कोकीन और मेथामफेटामाइन (Methamphetamine) जैसी घातक ड्रग्स की सप्लाई करता था। इसके लिए वे लंबे रूट वाले कमर्शियल ट्रकों (Long-haul transport routes) और गुप्त रूप से बनाए गए कैविटी कंटेनर्स का इस्तेमाल करते थे।
5. कहां-कहां हुईं गिरफ्तारियां और क्या-क्या हुआ बरामद?
इस बेहद गोपनीय और बड़े ऑपरेशन के तहत अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने अकेले कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो (Sacramento) इलाके में 23 और लॉस एंजिल्स (Los Angeles) में 11 ठिकानों पर एक साथ रेड मारी।
| क्षेत्र / देश | कार्रवाई की स्थिति |
|---|---|
| कैलिफोर्निया (USA) | 11 कुख्यात अपराधियों की गिरफ्तारी |
| इंडियाना, जॉर्जिया, कनाडा और स्पेन | बाकी आरोपियों की धरपकड़ और 50 से अधिक सर्च वारंट |
| कुल चार्ज्ड आरोपी | 37 (तीन अलग-अलग इंडिक्टमेंट्स में) |
| कुल गिरफ्तारियां | 24 (7 आरोपी पहले से ही अन्य मामलों में हिरासत में थे) |
| भगोड़े आरोपी | 10 (जिनकी तलाश में इंटरपोल और लोकल एजेंसियां जुटी हैं) |
बरामदगी की लिस्ट:
- कोकीन: लगभग 1,000 किलोग्राम (इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमत अरबों रुपये है)
- हेरोइन: 1 किलोग्राम
- हथियार: 12 अवैध और अत्याधुनिक फायरआर्म्स
- कैश: 40,000 अमेरिकी डॉलर
6. वैश्विक एजेंसियों का कड़ा रुख: “सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा थे ये सिंडिकेट्स”
इस कार्रवाई के बाद अमेरिकी और कनाडाई अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी देश की धरती पर पनपने वाले इस तरह के हिंसक गैंग्स को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
फर्स्ट असिस्टेंट अमेरिकी अटॉर्नी बिल एसाइली (Bill Essayli) का बयान:
“जो भी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह दुनिया में डर, ड्रग्स और हिंसा फैलाने का काम करेंगे, उन्हें न्याय के कटघरे में खड़ा होना ही पड़ेगा। अमेरिकी संघीय सरकार की पूरी ताकत ऐसे सिंडिकेट्स को कुचलने के लिए मुस्तैद है।”
एफबीआई (FBI) लॉस एंजिल्स फील्ड ऑफिस के असिस्टेंट डायरेक्टर पैट्रिक ग्रैंडी का बयान:
“आज के इस साझा और समन्वित ऑपरेशन ने उन तीन क्रूर अंतरराष्ट्रीय संगठनों के दिल पर सीधा प्रहार किया है, जिन्होंने अमेरिका और विदेशों में बेकसूर परिवारों को आतंकित किया था, समुदायों का शोषण किया था और क्रूर हिंसा के दम पर न जाने कितनी मासूम जिंदगियां छीन ली थीं।”
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मिली बड़ी कामयाबी
इस विशालकाय ऑपरेशन की सफलता के पीछे दुनिया की सबसे बड़ी जांच एजेंसियों का आपसी तालमेल था। इसमें एफबीआई (FBI), लॉस एंजिल्स पुलिस डिपार्टमेंट (LAPD), रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP – कनाडा), यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) और यूरोप की कई शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों ने महीनों तक खुफिया जानकारी साझा की। फिलहाल, कनाडाई अधिकारी दक्षिण एशियाई मूल के संगठित अपराध (South Asian Organised Crime) के खिलाफ एक समानांतर जांच भी चला रहे हैं, और फरार चल रहे बाकी 10 आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए बड़े पैमाने पर कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है।




