दुनिया में परमाणु हथियारों की होड़ लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर अमेरिका और रूस दशकों से सबसे बड़े परमाणु जखीरे वाले देश बने हुए हैं, वहीं चीन भी तेजी से अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाने में जुटा है। हाल के वर्षों में चीन ने मिसाइल साइलो, बैलिस्टिक मिसाइलों और परमाणु वारहेड्स के विकास पर बड़ा निवेश किया है, जिससे वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं।
रूस अब भी सबसे बड़ा परमाणु शक्ति संपन्न देश
उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार रूस के पास दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु भंडार है। रूस के पास कुल मिलाकर लगभग 5,400 से अधिक परमाणु वारहेड्स मौजूद हैं। इनमें तैनात, रिजर्व और निष्क्रिय किए जाने वाले वारहेड्स भी शामिल हैं। रूस की परमाणु क्षमता अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM), पनडुब्बियों और रणनीतिक बमवर्षकों पर आधारित है।
अमेरिका दूसरे स्थान पर
अमेरिका के पास करीब 5,200 से अधिक परमाणु वारहेड्स होने का अनुमान है। अमेरिकी परमाणु त्रिस्तरीय प्रणाली (Nuclear Triad) में जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलें, परमाणु पनडुब्बियां और लंबी दूरी के रणनीतिक बमवर्षक शामिल हैं। अमेरिका लगातार अपने परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण पर भी काम कर रहा है।
चीन तेजी से बढ़ा रहा है अपना परमाणु जखीरा
चीन अभी अमेरिका और रूस से काफी पीछे है, लेकिन उसकी वृद्धि सबसे तेज मानी जा रही है। विभिन्न रक्षा अध्ययनों के अनुसार चीन के पास करीब 600 परमाणु वारहेड्स होने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में चीन इस संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकता है।
चीन नए मिसाइल साइलो तैयार कर रहा है, आधुनिक हाइपरसोनिक हथियार विकसित कर रहा है और अपनी परमाणु पनडुब्बी क्षमता को भी लगातार मजबूत बना रहा है।
तीनों देशों की तुलना
| देश | अनुमानित परमाणु वारहेड्स |
|---|---|
| रूस | 5,400+ |
| अमेरिका | 5,200+ |
| चीन | लगभग 600 |
क्यों बढ़ रही है चिंता?
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की तेज परमाणु विस्तार नीति एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। वहीं अमेरिका और रूस के बीच हथियार नियंत्रण समझौतों का भविष्य भी अनिश्चित बना हुआ है। ऐसे में दुनिया की तीन सबसे बड़ी सैन्य शक्तियों के बीच परमाणु प्रतिस्पर्धा वैश्विक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनती जा रही है।




