
भुवनेश्वर, 30 जून (नेशनल डेस्क): ओड़ीशा की राजधानी भुवनेश्वर सोमवार को एक बार फिर बड़े आंदोलन का गवाह बनी। ओड़ीशा स्कूल कॉलेज टीचर्स एंड एम्प्लॉइज कोऑर्डिनेशन कमेटी (OSCTECC) के बैनर तले राज्य भर के हजारों स्कूल और कॉलेज शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर राजधानी की सड़कों पर उतरकर एक विशाल और ऐतिहासिक प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। इस प्रदर्शन के कारण भुवनेश्वर का निचला पीएमजी (Lower PMG) इलाका पूरी तरह छावनी में तब्दील हो गया और घंटों तक यातायात व्यवस्था ठप रही।
मांगों की लंबी फेहरिस्त: आखिर क्यों आंदोलित हैं शिक्षक?
OSCTECC के पदाधिकारियों के मुताबिक, वे पिछले कई वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के सामने अपनी मांगें रख रहे हैं, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। शिक्षकों और कर्मचारियों की मुख्य मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- पूर्ण अनुदान (Full Grant-in-Aid) की मांग: प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग यह है कि राज्य के सभी पात्र निजी और ब्लॉक-ग्रांट (Block-Grant) स्कूल-कॉलेजों को पूर्ण अनुदान सहायता प्रणाली के तहत लाया जाए। शिक्षकों का कहना है कि वे समान योग्यता और समान कार्य के बावजूद सरकारी शिक्षकों की तुलना में बहुत कम वेतन पर काम कर रहे हैं।
- सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें: एसोसिएशन की मांग है कि सभी अनुदान प्राप्त (Aided) शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के अनुसार संशोधित वेतनमान और बकाया राशि का भुगतान तुरंत किया जाए।
- पेंशन और सेवा सुरक्षा: शिक्षकों ने सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने और सेवा सुरक्षा के लिए उचित नियम बनाने की मांग की है।
- पदोन्नति और अन्य भत्ते: सरकारी कर्मचारियों की तरह समयबद्ध पदोन्नति (Promotion), चिकित्सा भत्ता और आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने की मांग भी इस आंदोलन का मुख्य हिस्सा है।
भुवनेश्वर की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब
सोमवार सुबह से ही ओड़ीशा के विभिन्न जिलों और सुदूर ग्रामीण इलाकों से हजारों की संख्या में शिक्षक, प्राध्यापक और गैर-शिक्षक कर्मचारी भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर जुटने शुरू हो गए थे। वहां से वे एक विशाल रैली के रूप में विधानसभा भवन की ओर बढ़े।
आंदोलन का दृश्य: प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर “समान काम-समान वेतन” और “हमारी मांगें पूरी करो” जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए भुवनेश्वर-कटक कमिश्नरेट पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। भारी संख्या में पुलिस बल, दंगा नियंत्रण वाहन और बैरिकेड्स लगाए गए थे ताकि प्रदर्शनकारी प्रतिबंधित क्षेत्रों (जैसे विधानसभा भवन) में प्रवेश न कर सकें।
जब रैली को लोअर पीएमजी के पास बैरिकेड्स लगाकर रोका गया, तो शिक्षक वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए। इसके बाद एक जनसभा का आयोजन किया गया, जिसे एसोसिएशन के विभिन्न वरिष्ठ नेताओं ने संबोधित किया।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है विपरीत असर
शिक्षकों के इस तरह बार-बार आंदोलन पर जाने से राज्य की स्कूली और उच्च शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है। कई संगठनों का कहना है कि जब शिक्षक मानसिक रूप से परेशान होंगे और अपनी आजीविका के लिए सड़कों पर संघर्ष करेंगे, तो वे कक्षाओं में शत-प्रतिशत योगदान कैसे दे पाएंगे?
एसोसिएशन के एक वरिष्ठ नेता ने सभा को संबोधित करते हुए कहा:
“हम बच्चों का भविष्य बनाना चाहते हैं, सड़कों पर बैठना हमारा शौक नहीं है। लेकिन जब सरकार हमारे भविष्य को ही अंधकार में डाल देगी, तो हमारे पास अपनी आवाज उठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। सरकार को यह समझना होगा कि एक शोषित शिक्षक कभी एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण नहीं कर सकता।”
सरकार का रुख और आगे की रणनीति
आंदोलन के उग्र रूप को देखते हुए राज्य सरकार के शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों और मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने OSCTECC के मुख्य नेताओं के साथ एक संक्षिप्त बैठक की। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा और बजटीय प्रावधानों के अनुसार चरणबद्ध तरीके से मांगों को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि, एसोसिएशन इस तरह के मौखिक आश्वासनों से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया। OSCTECC के समन्वयकों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने एक निश्चित समय सीमा के भीतर उनकी मांगों को पूरा करने के लिए कोई आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी नहीं की, तो वे आने वाले दिनों में पूरे राज्य में ‘काम बंद’ (Strike) आंदोलन शुरू करेंगे और सभी स्कूल-कॉलेजों में तालाबंदी कर दी जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
निष्कर्ष
भुवनेश्वर में हुआ यह प्रदर्शन ओड़ीशा की शिक्षा व्यवस्था के भीतर सुलग रहे असंतोष को दर्शाता है। ब्लॉक-ग्रांट और निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों का यह मुद्दा दशकों पुराना है। अब समय आ गया है कि सरकार इस समस्या का कोई स्थायी और ठोस समाधान निकाले, ताकि शिक्षकों को सम्मानजनक जीवन मिल सके और छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो।
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