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HomeNATIONALअसम के धेमाजी में बाढ़ का तांडव: जलमग्न हुए सैकड़ों गांव, जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त

धेमाजी, 29 जून (नेशनल डेस्क): असम में मानसून की दस्तक के साथ ही बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। राज्य के कई जिले इस समय भीषण जलप्रलय का सामना कर रहे हैं, जिनमें से धेमाजी जिला सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सोमवार को धेमाजी से सामने आई तस्वीरें और वीडियो इस प्राकृतिक आपदा की भयावहता को साफ बयां कर रहे हैं। चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है, घर, खेत, सड़कें और बुनियादी ढांचा सब कुछ जलमग्न हो चुका है।

हर साल आने वाली यह विभीषिका इस बार भी धेमाजी के लोगों के लिए तबाही का सबब बनकर आई है, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और हजारों परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है।

नदियों का बढ़ा जलस्तर, वश में नहीं हालात

धेमाजी जिले में पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश और पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश की पहाड़ियों से आने वाले अतिरिक्त पानी के कारण ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियां जैसे जिया ढल, गाई, और लाली उफान पर हैं। इन नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रहा है, जिसके कारण कई स्थानों पर तटबंध (Embankments) टूट गए हैं। तटबंध टूटने से नदियों का पानी तीव्र गति से रिहायशी इलाकों और कृषि भूमियों में प्रवेश कर गया है।

सोमवार को धेमाजी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हवाई और जमीनी दृश्यों से पता चलता है कि पूरा इलाका एक विशाल झील में तब्दील हो चुका है। ग्रामीण इलाकों में लोगों के घरों की छतें ही केवल पानी से ऊपर दिखाई दे रही हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

कृषि और आजीविका पर भारी वज्रपात

धेमाजी जिला मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र है, जहां की अधिकांश आबादी खेती और पशुपालन पर निर्भर है। इस अचानक आई बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी है।

  • फसलों की बर्बादी: सैकड़ों हेक्टेयर में लगी धान की फसल (Sali Paddy) और मौसमी सब्जियां पूरी तरह से पानी में डूबकर सड़ चुकी हैं। किसानों की महीनों की मेहनत और पूंजी कुछ ही घंटों में पानी में बह गई।
  • पशुधन पर संकट: इंसानों के साथ-साथ बेजुबान मवेशियों के लिए भी यह समय अत्यंत कठिन है। चारे के मैदान पानी में डूब जाने के कारण मवेशियों के लिए भोजन का संकट खड़ा हो गया है। कई जगहों पर मवेशियों के बाढ़ के पानी में बह जाने की भी दुखद खबरें सामने आ रही हैं। जो पशु बच गए हैं, उन्हें ऊंचे स्थानों या सड़कों के किनारे बांधकर रखा गया है।

राहत और बचाव कार्य: प्रशासन की चुनौतियां

बाढ़ की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें मुस्तैद हो गई हैं। प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नावों का सहारा लिया जा रहा है।

हालांकि, कई दूर-दराज के गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से पूरी तरह कट जाने के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में बचाव दलों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों पर कई फीट पानी जमा होने और पुलों के क्षतिग्रस्त होने के कारण जमीनी संपर्क टूट चुका है, जिससे केवल नावों के जरिए ही उन तक पहुंचा जा सकता है।

स्वास्थ्य संकट और पेयजल की किल्लत

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में इस समय सबसे बड़ी चुनौती पीने के साफ पानी की है। चापाकल (Handpumps) और कुएं बाढ़ के दूषित पानी में डूब चुके हैं, जिससे पानी का स्रोत पूरी तरह प्रदूषित हो गया है। ऐसे में दूषित पानी पीने के कारण जलजनित बीमारियों (Water-borne diseases) जैसे डायरिया, गैस्ट्रोएंटेराइटिस, और त्वचा रोगों के फैलने का खतरा बहुत बढ़ गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमें भेजी हैं और राहत शिविरों में ब्लीचिंग पाउडर तथा ओआरएस (ORS) के पैकेट बांटे जा रहे हैं, ताकि किसी भी संभावित महामारी को रोका जा सके।

निष्कर्ष और स्थायी समाधान की मांग

धेमाजी में हर साल आने वाली बाढ़ केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल उन्हें इसी तरह की तबाही का सामना करना पड़ता है, राहत सामग्री मिलती है, पानी उतर जाता है, और फिर अगले साल कहानी दोहराई जाती है।

पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नदियों के गाद (Siltation) को साफ नहीं किया जाता और वैज्ञानिक तरीके से मजबूत तटबंधों का निर्माण नहीं होता, तब तक धेमाजी और पूरे असम को इस सालाना त्रासदी से मुक्ति नहीं मिल सकती। सरकार को इसके लिए दीर्घकालिक और स्थायी मास्टर प्लान तैयार करने की आवश्यकता है ताकि हर साल होने वाले जान-माल के भारी नुकसान को रोका जा सके।

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Posted By City Home News

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